Russia-Ukraine Crisis: रूस और यूक्रेन के बीच टकराव के इतिहास पर एक नजर...
Russia-Ukraine Conflicts किसी भी हमले की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने का विकल्प यूक्रेन के पास रहेगा जिससे वह रूस को रोक सकता है। नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन के शुरू होने के बाद यूक्रेन के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।

नई दिल्ली, जेएनएन। रूस और यूक्रेन के बीच टकराव चरम पर है। अमेरिका लगातार कह रहा है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। पूरी दुनिया की निगाहें इस संकट पर टिकी हुई हैं। मौजूदा स्थिति, टकराव के इतिहास और विभिन्न पक्षों के नजरिये की पड़ताल:
यह है रूस का रुख : हथियार, प्रशिक्षण एवं सैनिक के रूप में यूक्रेन को नाटो से मिलने वाले सहयोग को रूस अपने लिए खतरा मानता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ऐसा समझौता चाहते हैं, जिसमें गारंटी ली जाए कि यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं बनेगा और नाटो रूस की तरफ विस्तार नहीं करेगा। उन्होंने यूक्रेन में नाटो का मिसाइल सिस्टम तैनात होने पर भी सवाल उठाया है। रूस का स्पष्ट कहना है कि अगर अमेरिका और नाटो यूक्रेन के मामले में अपना रवैया नहीं बदलेंगे, तो रूस को अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
पिछले कुछ वषों से है तनातनी की स्थिति : यूक्रेन से लगती सीमाओं पर रूस ने एक लाख से ज्यादा सैनिक तैनात किए हुए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि रूस किसी भी समय यूक्रेन पर हमला कर सकता है। रूस और यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा थे। मौजूदा टकराव 2013 में उभरा था, जब यूक्रेन में रूस समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने यूरोपीय यूनियन से चल रही अहम राजनीतिक एवं कारोबारी डील रोक दी थी। इसके विरोध में वहां कई हफ्ते हिंसक आंदोलन हुए थे। मार्च, 2014 में रूस ने क्रीमिया पर नियंत्रण कर लिया। इसके कुछ ही समय बाद यूक्रेन के डोनत्स्क और लुहांस्क में रूस समर्थक अलगाववादियों ने इन क्षेत्रों को स्वायत्त घोषित कर दिया। फ्रांस और जर्मनी के प्रयासों से इन क्षेत्रों को स्वायत्त घोषित करने के लिए यूक्रेन और रूस में समझौता भी हुआ, लेकिन टकराव नहीं रुका। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक मार्च, 2014 से अब तक विभिन्न टकराव में 3,000 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है।
नाटो और अमेरिका ने रूस को चेताया : नाटो और अमेरिका लगातार रूस को चेतावनी दे रहे हैं। नाटो का कहना है कि यदि रूस ने यूक्रेन पर हमले जैसा कदम उठाया तो उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। उसे आर्थिक, वित्तीय और राजनीतिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यूक्रेन अभी नाटो का सदस्य नहीं है, ऐसे में उसकी सहायता को लेकर नाटो के पास सीमित विकल्प है। हालांकि नाटो ने कहा है कि यूक्रेन के पास सदस्य का बनने का विकल्प हर समय खुला है। जो बाइडन लगातार रूस को परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं।
यूक्रेन चाहता है फैसले का अधिकार : यूक्रेन का कहना है कि यदि वह नाटो के साथ संबंध बढ़ाता है, तो इसमें रूस को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। नाटो से जुड़ना या न जुड़ना उसके अधिकार में आता है। यूक्रेन को नाटो का सदस्य न बनने की गारंटी पूरी तरह अवैधानिक है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया है कि रूस सैन्य तख्तापलट के जरिये यूक्रेन में अस्थिरता फैलाना चाहता है। अपने यहां ऊर्जा संकट के लिए भी वह रूस को जिम्मेदार मानते हैं। घरेलू मोर्चे पर भी यूक्रेन कई राजनीतिक संकट से जूझ रहा है।
बिगड़ते हालात में कुछ अन्य पहलुओं पर भी बनी हुई है सभी पक्षों की नजर : इस साल की शुरुआत में कजाखस्तान में व्यापक पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं। हिसंक प्रदर्शनों के चलते वहां आपातकाल लगाना पड़ा और हिंसा से निपटने के लिए रूस की अगुआई में सेना लगानी पड़ी। निश्चित तौर पर कजाखस्तान में किसी भी तरह का तनाव रूस के हित में नहीं है। दूसरी ओर नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन भी तनाव का कारण बना हुआ है। रूस और जर्मनी को जोड़ने वाली इस पाइपलाइन को यूक्रेन अपने लिए खतरा मानता है। यह पाइपलाइन यूक्रेन से होकर नहीं गुजरेगी। अभी रूस से यूरोप ईंधन पहुंचाने वाली पाइपलाइन यूक्रेन से होते हुए गुजरती हैं। यूक्रेन इन्हें अपनी सुरक्षा की गारंटी मानता है।